Vikas Divyakirti Best Father Parenting Tips: विकास दिव्यकीर्ति की सीख: कैसे बनें “बेस्ट पिता”?

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में पेरेंटिंग (Parenting) आसान काम नहीं है। हर मां-पिता यही सोचते हैं कि वे अपने बच्चों के लिए सबसे अच्छे माता-पिता साबित हों। लेकिन सवाल उठता है कि “बेस्ट पिता” कौन है? इसका जवाब दिया है जाने-माने शिक्षक विकास दिव्यकीर्ति (Vikas Divyakirti Best Father Parenting Tips) ने।

उनकी नज़र में पिता सिर्फ वह नहीं जो बच्चों की ज़रूरतें पूरी करे, बल्कि वह है जो असफलता के समय भी बच्चे का हौसला बनाए रखे। आइए जानते हैं वह प्रेरणादायक कहानी, जिसे सुनकर हर पिता अपने रोल को और बेहतर समझ पाएगा।

एक पिता की अनोखी सोच

मध्य प्रदेश के सागर ज़िले का एक उदाहरण दिव्यकीर्ति जी ने साझा किया। वहाँ का एक लड़का दसवीं की परीक्षा में फेल हो गया। समाज की नज़रों में यह असफलता बड़ी थी। आमतौर पर लोग बच्चे को डांटते, शर्मिंदा करते या ताने मारते। लेकिन उस लड़के के पिता ने ऐसा कुछ भी नहीं किया।

बल्कि, उन्होंने बेटे का सम्मान बढ़ाने के लिए घर पर पार्टी रखी और रिश्तेदारों-पड़ोसियों को बुलाकर कहा – “मेरा बेटा पास नहीं हो पाया, लेकिन उसने मेहनत की। हमें उसकी कोशिश पर गर्व है।”

असफलता से सीखने की ताकत

यह घटना सिखाती है कि असफलता को अंत मान लेना गलत है। बच्चे से अगर हम कहें कि “तुम हार गए, अब तुम्हारा भविष्य खराब है” तो उसका आत्मविश्वास टूट जाता है।
दिव्यकीर्ति जी कहते हैं कि “फेल होना हार नहीं, बल्कि सीखने का मौका है।”

हर असफलता यह बताती है कि आगे हमें कहाँ सुधार करना है। पिता का काम है बच्चे को यह एहसास दिलाना कि असफलता भी सफलता की सीढ़ी है।

बच्चों को सम्मान और सुरक्षा देना

बच्चे तभी आत्मविश्वासी बनते हैं जब उन्हें अपने घर में इज़्ज़त और सुरक्षा महसूस हो। अगर पिता ही उन्हें बार-बार ताना मारेगा, दूसरों से तुलना करेगा, तो बच्चा अंदर से टूट जाएगा।

लेकिन अगर पिता कहे – “कोई बात नहीं बेटा, इस बार कोशिश अधूरी रही, अगली बार हम साथ मिलकर बेहतर करेंगे” – तो बच्चा मजबूती के साथ आगे बढ़ेगा।

पेरेंटिंग का असली मंत्र

विकास दिव्यकीर्ति का कहना है कि माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों से अपेक्षाएँ रखें, लेकिन साथ ही उनकी भावनाओं को भी समझें।

  • सिर्फ अंकों पर ध्यान न दें, बल्कि प्रयास को भी सराहें।
  • असफलता पर डांटने की बजाय सीखने का अवसर दें।
  • बच्चों को यह विश्वास दिलाएँ कि वे किसी भी हाल में अपने माता-पिता की नज़रों में सम्मानित हैं।

बच्चे के आत्मविश्वास की नींव

जब बच्चा जानता है कि उसका पिता उसके साथ खड़ा है, तो उसमें हर चुनौती का सामना करने का साहस आ जाता है। यही साहस आगे चलकर उसे जीवन की बड़ी-बड़ी मुश्किलों से लड़ने में मदद करता है।

यानी “बेस्ट पिता” वही है, जो अपने बच्चे को न सिर्फ सपोर्ट करता है बल्कि उसे आत्मनिर्भर और मजबूत इंसान बनने की प्रेरणा देता है।

निष्कर्ष

विकास दिव्यकीर्ति की यह कहानी हर पिता के लिए एक आईना है। असली पितृत्व तभी है जब आप बच्चे की असफलताओं को भी खुले दिल से स्वीकारें और उसे हौसला दें।

अगर आप सचमुच “बेस्ट पिता” बनना चाहते हैं, तो अपने बच्चे को सिर्फ सफल नहीं, बल्कि खुश और आत्मविश्वासी इंसान बनाने की जिम्मेदारी लें।

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