आसिफ अली जरदारी का बड़ा कबूलनामा: ‘जब भारतीय हमलों के डर से बंकर में छिपने की आ गई थी नौबत’

नई दिल्ली/इस्लामाबाद: दक्षिण एशिया की राजनीति और रक्षा गलियारों में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी (Asif Ali Zardari) ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भारत की सैन्य शक्ति का लोहा माना। जरदारी ने पहली बार आधिकारिक रूप से स्वीकार किया कि मई 2025 में भारत द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के दौरान पाकिस्तान का शीर्ष नेतृत्व गहरे खौफ में था। जरदारी ने बताया कि स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी कि उनके मिलिट्री सेक्रेटरी ने उन्हें तुरंत सुरक्षा के लिए अंडरग्राउंड बंकर में जाने की सलाह दी थी।

क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और क्यों मचा था खौफ?

इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम (Pahalgam) में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ था, जिसमें भारत के 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। इस कायराना हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई 2025 की रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। भारतीय वायुसेना और मिसाइल यूनिट्स ने पाकिस्तान के अंदर और PoJK में स्थित 9 आतंकी शिविरों और 11 सैन्य ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया था।

जरदारी ने उसी रात का जिक्र करते हुए कहा, “मेरे मिलिट्री सेक्रेटरी मेरे पास आए और बोले- सर, जंग शुरू हो चुकी है, हमें तुरंत बंकर में चलना चाहिए।” जरदारी का यह बयान उन दावों की पुष्टि करता है कि भारत की जवाबी कार्रवाई ने पाकिस्तान के रडार सिस्टम और सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह पंगु बना दिया था।

‘शहादत आएगी तो यहीं आएगी’: जरदारी का दावा

हालांकि जरदारी ने खुद को एक निडर नेता दिखाने की कोशिश करते हुए कहा कि उन्होंने बंकर में जाने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को बताया, “मैंने अपने सचिव से कहा कि अगर शहादत आनी है तो यहीं आएगी। नेता बंकरों में नहीं मरते, वे मैदान-ए-जंग में मरते हैं।” लेकिन रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि जरदारी का यह बयान असल में पाकिस्तान की सेना की नाकामी को दर्शाता है। यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान की एयर डिफेंस प्रणाली (Air Defense System) भारतीय मिसाइलों को रोकने में पूरी तरह विफल रही थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह India’s Surgical Strike Strategy की एक बड़ी जीत थी। जिस तरह से भारत ने सटीक स्ट्राइक की, उसने पाकिस्तान के ‘परमाणु ब्लैकमेल’ की रणनीति को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है।

पाकिस्तान की सेना बनाम नागरिक सरकार: गहराता संकट

जरदारी के इस खुलासे ने पाकिस्तान के भीतर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। पाकिस्तान में हमेशा से सेना का दबदबा रहा है, लेकिन एक राष्ट्रपति द्वारा यह मानना कि ‘सेना बंकरों की तलाश कर रही थी’, पाकिस्तानी सेना (ISPR) के लिए बड़ी शर्मिंदगी का विषय है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि पाकिस्तान की नागरिक सरकार और सेना के बीच तालमेल की भारी कमी है।

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) की रिपोर्ट्स और Ministry of External Affairs (India) के बयानों में अक्सर यह कहा गया है कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। जरदारी का यह कबूलनामा भारत की इसी ‘प्रो-एक्टिव’ डिफेंस पॉलिसी पर अंतरराष्ट्रीय मुहर लगाता है। अधिक जानकारी के लिए आप हमारी वेबसाइट पर अन्य अपडेट्स भी पढ़ सकते हैं।

भारत की सामरिक शक्ति और बदलता क्षेत्रीय समीकरण

2025 में हुए इस टकराव के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि भारत अब केवल कड़े शब्दों में निंदा करने वाला देश नहीं रहा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत ने न केवल आतंकी ठिकानों को बल्कि पाकिस्तान के ‘नूर खान एयरबेस’ को भी भारी नुकसान पहुँचाया था। जरदारी ने स्वीकार किया कि उस समय उन्हें लगने लगा था कि भारत पूर्ण पैमाने पर युद्ध (Full-scale war) शुरू कर चुका है।

इस बयान के दूरगामी परिणाम होंगे:

  • वैश्विक छवि: पाकिस्तान की एक ‘कमजोर राष्ट्र’ के रूप में छवि उभरेगी जो भारत के दबाव का सामना नहीं कर सकता।
  • आंतरिक दबाव: जरदारी को अपनी ही सेना के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है।
  • भारत का कद: वैश्विक मंच पर भारत की सैन्य साख और ‘डिसीसिव लीडरशिप’ (Decisive Leadership) की चर्चा और तेज होगी।

निष्कर्ष

आसिफ अली जरदारी का यह ‘ऐतिहासिक कबूलनामा’ केवल एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि यह एक स्वीकारोक्ति है कि नए भारत की सैन्य नीति ने पाकिस्तान के मन में गहरा डर पैदा कर दिया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वह रात पाकिस्तान कभी नहीं भूल पाएगा, और जरदारी के ये शब्द भविष्य के इतिहास में पाकिस्तान की बेबसी के प्रमाण के रूप में दर्ज रहेंगे। अब देखना यह होगा कि भारत सरकार और भारतीय रक्षा मंत्रालय इस पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हैं।

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